भारत में एलजीबीटी अधिकार

भारत में लेस्बियन, गे, बाइसेक्शुअल एवं ट्रांसजेंडर (एलजीबीटी) लोगों को गैर-एलजीबीटी व्यक्तियों द्वारा अनुभव नहीं किए जाने वाले कानूनी और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। पिछले एक दशक में, एलजीबीटी लोगों ने भारत में अधिक से अधिक सहिष्णुता प्राप्त की है, खासकर बड़े शहरों में।

फिर भी, भारत में अधिकांश एलजीबीटी लोग गुप्त रहते हैं, अपने परिवारों से भेदभाव के डर से, जो समलैंगिकता को शर्मनाक देख सकते हैं। एलजीबीटी समुदाय के सदस्यों के सम्मान हत्याओं, हमलों, यातनाओं और पिटाई की रिपोर्ट भारत में असामान्य नहीं हैं। भेदभाव और अज्ञानता विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद है, जहां एलजीबीटी लोगों को अक्सर अपने परिवारों से अस्वीकृति का सामना करना पड़ता है और विपरीत लिंग विवाह के लिए मजबूर किया जाता है। समान लिंग के लोगों के बीच यौन गतिविधि कानूनी है लेकिन समान-लिंग वाले जोड़े कानूनी रूप से विवाह नहीं कर सकते हैं या नागरिक भागीदारी प्राप्त नहीं कर सकते हैं। ६ सितंबर २०१८ को, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने धारा ३७७ (भारतीय दण्ड संहिता) को असंवैधानिक घोषित करके समलैंगिकता के अपराधीकरण को समाप्त कर दिया। २०१४ के बाद से, भारत में ट्रांसजेंडर लोगों को बिना लिंग परीक्षण के लिंग बदलने की सर्जरी करने की अनुमति दी गई है, और तीसरे लिंग के तहत खुद को पंजीकृत करने का संवैधानिक अधिकार है। इसके अतिरिक्त, कुछ दक्षिण एशिया के राज्यो में, आवास कार्यक्रमों, कल्याणकारी लाभों, पेंशन योजनाओं, सरकारी अस्पतालों में मुफ्त सर्जरी और उनकी सहायता के लिए डिज़ाइन किए गए अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से हिजड़ों की रक्षा करते हैं। भारत में लगभग ४८ लाख ट्रांसजेंडर लोग हैं।

Stigmabase global initiative

Keeping up-to-date on global exclusion



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Montréal | Canada

Montréal is made by creators and innovators Greater Montreal has nearly 250,000 college and university students — that’s more students per capita than any other North American city.